महर्षि मेंहीं जयंती 2026: फारबिसगंज में निकली भव्य शोभायात्रा, 'जय गुरु महाराज' के जयकारों से भक्तिमय हुआ माहौल।

Edited By: Hemant yadav
Updated At: 01 May 2026 06:24:21

कुप्पा घाट की गुफा से ब्रह्मज्ञान तक: कैलाश बाबा ने सुनाया महर्षि मेंहीं परमहंस का गौरवशाली इतिहास।

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भक्ति का सैलाब: महर्षि मेंहीं परमहंस जी की 142वीं जयंती पर गूंजा फारबिसगंज, शोभायात्रा में उमड़े हजारों श्रद्धालु

संवाददाता: टाइम्स भारत न्यूज़ डेस्क

स्थान: फारबिसगंज (अररिया)

तारीख: 1 मई, 2026

1. केसरिया ध्वजों से पटा शहर, जयकारों से गूंजा आकाश

संत सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज की 142वीं पावन जयंती के उपलक्ष्य में गुरुवार को फारबिसगंज के चौरा परवाहा क्षेत्र में भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। संतमत मंदिर, चौरा परवाहा (भागकोहलिया) द्वारा आयोजित इस भव्य शोभायात्रा में फूलों से सजे वाहनों पर गुरु महाराज की तस्वीर विराजमान थी। बैंड-बाजे की धुन और 'सद्गुरु महाराज की जय' के नारों के साथ सैकड़ों की संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु हाथों में केसरिया झंडा लिए चल रहे थे।

2. शोभायात्रा का मार्ग और आध्यात्मिक समागम

यह शोभायात्रा चौरा परवाहा आश्रम से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों—पंचमुखी मंदिर, हाई स्कूल रोड, धर्मशाला चौक, दीनदयाल चौक और गोडि़यारे चौक से होते हुए पुनः आश्रम पहुंची। आश्रम में यात्रा के समापन के पश्चात सामूहिक स्तुति-विनती की गई, जिसके बाद संतों के प्रवचन का अमृत पान श्रद्धालुओं ने किया।

3. 'ब्रह्मज्ञान' और कठिन तपस्या का मार्ग: कैलाश बाबा

प्रवचन सभा को संबोधित करते हुए कैलाश बाबा ने महर्षि मेंहीं के जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि:

  • विलक्षण जन्म: गुरु महाराज का जन्म बैशाख शुक्ल चतुर्दशी (1885 ई.) को मधेपुरा के खोकसी श्याम गाँव में हुआ था। जन्म के समय उनके सिर पर सात जटायें थीं, जो उनके दिव्य स्वरूप का संकेत थीं।
  • तपस्या का सफर: बचपन में 'रामानुग्रह लाल दास' और बाद में 'मेंहीं लाल' के नाम से जाने जाने वाले गुरु महाराज ने भागलपुर के कुप्पा घाट की गुफा में वर्षों कठिन तपस्या कर ब्रह्मज्ञान प्राप्त किया।
  • ब्रह्मलीन: आजीवन ब्रह्मचारी रहकर ईश्वर भक्ति का मार्ग दिखाने वाले गुरुदेव 8 जून 1986 को ब्रह्मलीन हुए।

4. भंडारे के साथ समापन

इस गरिमामयी आयोजन में मुनिलाल बाबा, नरेश सिंह, मनोज साह, महेंद्र साह, बबलू साह और हेमंत यादव सहित सैकड़ों सत्संगी सक्रिय रूप से शामिल हुए। कार्यक्रम के अंत में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जहाँ श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण हुआ।

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