अररिया से पटना तक हलचल: बिहार में बढ़ेंगी 120+ विधानसभा सीटें, महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी 121 सीटें—टाइम्स भारत न्यूज़ एक्सक्लूसिव
बिहार @ 2029: लोकसभा की 60 और विधानसभा की 365 सीटें! महिला आरक्षण और परिसीमन से बदलेगी बिहार की किस्मत
बड़ी खबर: महिला आरक्षण के बाद बदलेगा बिहार का सियासी नक्शा, लोकसभा की 60 और विधानसभा की 365+ सीटें होने के आसार!
विशेष रिपोर्ट: टाइम्स भारत न्यूज़ डेस्क तारीख: 25 मार्च, 2026
पटना/नई दिल्ली: बिहार की राजनीति में आने वाले कुछ वर्षों में एक बड़ा ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। महिला आरक्षण कानून (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के प्रभावी होने और साल 2026 के बाद होने वाले नए परिसीमन से बिहार में लोकसभा और विधानसभा की सीटों की संख्या में भारी बढ़ोतरी होने की संभावना है। केंद्र सरकार द्वारा 2011 की जनगणना को आधार बनाकर जल्द परिसीमन की सुगबुगाहट ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।

बिहार में सीटों का नया समीकरण (संभावित)
वर्तमान में बिहार में लोकसभा की 40 और विधानसभा की 243 सीटें हैं। विशेषज्ञों और हालिया प्रस्तावों के अनुसार, परिसीमन के बाद सीटों की संख्या 50% तक बढ़ सकती है:
- लोकसभा सीटें: वर्तमान 40 से बढ़कर 60 होने की उम्मीद है।
- विधानसभा सीटें: वर्तमान 243 से बढ़कर 365 या उससे अधिक हो सकती हैं।
महिला आरक्षण का दिखेगा असली असर
नए कानून के तहत 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। अगर सीटों की संख्या बढ़ती है, तो महिलाओं की भागीदारी इस प्रकार होगी:
- लोकसभा में: बिहार की 60 सीटों में से लगभग 20 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
विधानसभा में: 365 सीटों में से लगभग 121 सीटें महिला विधायकों के लिए सुरक्षित होंगी।

क्यों बढ़ेंगी सीटें?
संविधान के 84वें संशोधन के तहत सीटों की संख्या पर लगा 'फ्रीज' साल 2026 में समाप्त हो रहा है। बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में जनसंख्या वृद्धि दर अन्य राज्यों की तुलना में अधिक रही है। 'एक वोट, एक मूल्य' के लोकतांत्रिक सिद्धांत को बनाए रखने के लिए बढ़ी हुई जनसंख्या के अनुपात में सीटों का पुनर्गठन अनिवार्य है।

दक्षिण बनाम उत्तर: संतुलन बनाने की कोशिश
सीटों की बढ़ोतरी को लेकर दक्षिण भारतीय राज्यों में यह डर था कि जनसंख्या नियंत्रण में सफल होने के कारण उनकी सीटें कम हो जाएंगी। हालांकि, केंद्र सरकार के नए फॉर्मूले (Pro-rata Basis) के अनुसार, सभी राज्यों की सीटों में समानुपातिक (जैसे 50%) वृद्धि की जाएगी ताकि किसी भी राज्य का मौजूदा प्रतिनिधित्व कम न हो और उत्तर भारतीय राज्यों (जैसे बिहार-यूपी) को उनकी आबादी का सही हक मिले।
राजनीतिक दलों की बदली रणनीति
इस संभावित बदलाव ने बिहार के बड़े राजनीतिक दलों (RJD, JDU, BJP और Congress) को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है।
- नए चेहरों की तलाश: 122 नई विधानसभा सीटें जुड़ने से नए और युवा नेताओं को मौका मिलेगा।
- महिला नेतृत्व: हर तीसरी सीट महिला के लिए होने से अब पार्टियों को जमीनी स्तर पर महिला कार्यकर्ताओं को तैयार करना होगा।
- क्षेत्रीय प्रभाव: अररिया, पूर्णिया और कटिहार जैसे सीमांचल इलाकों में भी नई सीटें सृजित होने से स्थानीय विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।