पहलगाम बरसी: तिलक और कलावा देखकर किया गया था कत्लेआम, क्या 'ऑपरेशन सिंदूर' ने ले लिया पूरा बदला?

Edited By: Jay Dubey
Updated At: 22 April 2026 23:04:04

22 अप्रैल 2025 की दोपहर जब पूरा देश अपनी रफ्तार में था, तब कश्मीर की वादियों में स्थित पहलगाम के बैसारन मैदान (Baisaran Valley) में मौत का नग्न नाच हुआ।

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 संपादकीय: पहलगाम की बरसी—'वोट तंत्र' से 'राष्ट्र तंत्र' तक, भारत की वो चीख जिसने आतंकवाद की कमर तोड़ दी

लेखक: संपादक, टाइम्स भारत न्यूज़ तारीख: 22 अप्रैल, 2026

1. 22 अप्रैल 2025: भारत की आत्मा पर प्रहार

आज से ठीक एक साल पहले, 22 अप्रैल 2025 की दोपहर जब पूरा देश अपनी रफ्तार में था, तब कश्मीर की वादियों में स्थित पहलगाम के बैसारन मैदान (Baisaran Valley) में मौत का नग्न नाच हुआ। मजहब और नफरत के नाम पर तीन आतंकियों ने जो किया, उसने पूरी दुनिया को झकझोर दिया।

वह हमला सिर्फ पर्यटकों पर नहीं, भारत की 'सांझा संस्कृति' और 'अतिथि देवो भव:' की आत्मा पर था। आतंकियों ने लोगों को कतार में खड़ा किया, उनके हाथ देखे, गले में 'कलावा' और माथे पर 'तिलक' देखकर पहचान पूछी। यहाँ तक कि उन्हें 'कलमा' पढ़ने पर मजबूर किया गया और इनकार करने पर सरेआम गोलियों से भून दिया गया।

2. हनीमून के सपने और वो 'लाल सिंदूर'

पहलगाम हमले की सबसे हृदयविदारक तस्वीर उन नवविवाहित जोड़ों की थी, जो अपनी नई जिंदगी के सपने लेकर वहां पहुंचे थे। वह जोड़ा जो अपना हनीमून मनाने गया था, लेकिन मजहबी उन्माद ने उनकी मांग का सिंदूर पोंछ दिया। पतियों को उनकी पत्नियों के सामने ही मार दिया गया। इस क्रूरता ने भारत को रुलाया जरूर, लेकिन आतंकियों की यह गलतफहमी थी कि वे भारत को झुका लेंगे।

आतंकवाद का असली मकसद हिंदुओं और मुसलमानों के बीच नफरत की खाई पैदा करना था। वे चाहते थे कि भारत का समाज टूट जाए, लेकिन भारत के लोगों ने एकजुट होकर इस नफरत को खारिज कर दिया।

3. 'ऑपरेशन सिंदूर': 7 मई 2025 का वो प्रलयकारी जवाब

भारत की शांति को कायरता समझने वालों को जवाब देना जरूरी था। हमले के ठीक 15 दिन बाद, 7 मई 2025 की रात को भारतीय वायुसेना और थल सेना ने 'ऑपरेशन सिंदूर' का बिगुल फूंका।

  • मिशन का नाम: 'ऑपरेशन सिंदूर' उन विधवाओं के सम्मान में रखा गया जिनकी मांग आतंकियों ने उजाड़ी थी।
  • सटीक प्रहार: भारतीय वायुसेना के विमानों ने सीमा पार (PoJK) और पाकिस्तान के भीतर 9 आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया।
  • नतीजा: लश्कर (LeT) और जैश (JeM) के 'मास्टरमाइंड' सहित 100 से अधिक आतंकियों को उनके अंत तक पहुँचाया गया। यह प्रधानमंत्री मोदी का वह 'डायरेक्ट एक्शन' था जिसने पाकिस्तान को दुनिया के सामने अलग-थलग कर दिया।

4. ऑपरेशन का 'टेरर': जब दुनिया ने देखा नया भारत

'ऑपरेशन सिंदूर' केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, यह नए भारत का 'रणघोष' था। पहली बार भारत ने स्पष्ट संदेश दिया कि हम अब केवल 'कड़ी निंदा' नहीं करते, हम घर में घुसकर मारते हैं। इजराइल से लेकर अमेरिका तक ने भारत के 'सेल्फ डिफेंस' के अधिकार का समर्थन किया। यह हमला उन लोगों के लिए जवाब था जो भारत को कमजोर समझते थे।

5. निष्कर्ष: याद है, भूले नहीं हैं हम!

आज पहलगाम हमले की बरसी पर टाइम्स भारत न्यूज़ उन 26 निर्दोष नागरिकों और उस स्थानीय मुस्लिम भाई को नमन करता है, जिसने पर्यटकों को बचाने के लिए अपनी जान दे दी।

आतंकवाद ने हमें चोट पहुँचाई, हमारे अपनों को छीना, लेकिन वह हमारी 'समाजिक समरसता' को नहीं छीन पाया। पहलगाम की पीड़ा आज भी हर भारतीय के दिल में है, और 'ऑपरेशन सिंदूर' का गर्व हर सैनिक की रगों में। भारत झुकेगा नहीं, भारत थकेगा नहीं।

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