'पुष्प की अभिलाषा' के रचयिता माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती: फारबिसगंज में साहित्यकारों ने दी 'एक भारतीय आत्मा' को श्रद्धांजलि

Edited By: Hemant yadav
Updated At: 04 April 2026 23:47:37

विशेष रिपोर्ट: 4 अप्रैल—कलम के उस सिपाही का जन्मदिन, जिसने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ छिड़ी थी वैचारिक जंग

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विशेष रिपोर्ट: "मुझे तोड़ लेना वनमाली..."—पंडित माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती पर गूंजी राष्ट्रभक्ति, 'इंद्रधनुष' ने दी महाकवि को भावांजलि

संवाददाता:हेमंत यादव

 टाइम्स भारत न्यूज़ डेस्क स्थान: फारबिसगंज (अररिया) तारीख: 4 अप्रैल, 2026

प्रस्तावना: राष्ट्रचेतना के स्वर का वंदन

भारतीय साहित्य के आकाश में 'एक भारतीय आत्मा' के नाम से सुशोभित, प्रखर पत्रकार और महान स्वतंत्रता सेनानी पंडित माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती आज फारबिसगंज में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई। स्थानीय साहित्यिक संस्था 'इंद्रधनुष साहित्य परिषद' के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल एक कवि को याद किया, बल्कि उस राष्ट्रीय चेतना को भी पुनर्जीवित किया जिसने आजादी की लड़ाई में प्राण फूंके थे।

1. वरिष्ठ शिक्षक के परिसर में साहित्यकारों का समागम

शनिवार, 4 अप्रैल को यह गरिमामयी समारोह परिषद के वरिष्ठ सदस्य और सेवानिवृत्त शिक्षक सुरेंद्र प्रसाद मंडल के आवासीय परिसर में आयोजित हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात वरिष्ठ बाल साहित्यकार हेमंत यादव ने की।

समारोह का शुभारंभ पंडित माखनलाल चतुर्वेदी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। उपस्थित साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने नम आंखों से उस महामानव को नमन किया, जिनकी कविताओं ने ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिला दी थी।

2. 'पुष्प की अभिलाषा' और चतुर्वेदी जी का विराट व्यक्तित्व

परिचर्चा के दौरान वक्ताओं ने चतुर्वेदी जी के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। 4 अप्रैल 1889 को मध्य प्रदेश के बाबई गाँव में जन्मे माखनलाल जी केवल एक लेखक नहीं, बल्कि बहुभाषी विद्वान थे।

मुख्य वक्ताओं के विचार:

  • हेमंत यादव (सभाध्यक्ष): उन्होंने कहा कि चतुर्वेदी जी की कविता 'पुष्प की अभिलाषा' आज भी हर भारतीय के रगों में जोश भर देती है। जब वे कहते हैं— "मुझे तोड़ लेना वनमाली, उस पथ पर तुम देना फेंक, मातृभूमि पर शीश चढ़ाने, जिस पथ जावें वीर अनेक"—तो यह पुष्प का नहीं, बल्कि हर देशभक्त का संकल्प बन जाता है।
  • पूर्व प्राचार्य हरिशंकर झा और संस्थापक सचिव विनोद कुमार तिवारी: इन्होंने बताया कि चतुर्वेदी जी संस्कृत, उर्दू, फारसी, बंगला और अंग्रेजी जैसी अनेक भाषाओं के ज्ञाता थे, लेकिन उनकी आत्मा हमेशा भारतीयता में रची-बसी रही।
  • उपाध्यक्ष प्रमोद कुमार झा और उप सचिव अरविंद ठाकुर: इन्होंने उनके पत्रकारिता पक्ष पर जोर देते हुए बताया कि 'प्रभा' और 'कर्मवीर' जैसे पत्रों के माध्यम से उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ जो बिगुल फूंका, वह अद्वितीय था।

3. सम्मान और उपलब्धियां: साहित्य के देवता

कार्यक्रम में उपस्थित सुरेंद्र प्रसाद मंडल, हरि नंदन मेहता, हर्ष नारायण दास और युवा कवियों ने उनके साहित्यिक अवदानों की चर्चा की।

  • पहला साहित्य अकादमी पुरस्कार: 1955 में उनकी अमर कृति 'हिमतरंगिणी' के लिए उन्हें देश का पहला साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
  • पद्मभूषण: 1963 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मभूषण से अलंकृत किया।
  • पत्रकारिता के पुरोधा: उनकी स्मृति में भोपाल में स्थापित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय आज भी देश के पत्रकारों के लिए मक्का-मदीना के समान है।

4. शिक्षा और प्रतिभा का सम्मान: 'लकी' और 'रिया' सम्मानित

इंद्रधनुष साहित्य परिषद ने इस अवसर को केवल भाषणों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि समाज की प्रतिभाओं को प्रोत्साहित कर चतुर्वेदी जी के 'शिक्षा और चेतना' के सपने को साकार किया। इंटरमीडिएट परीक्षा में उत्कृष्ट अंक लाने वाली छात्राएं— लक्की प्रिया और रिया रानी को परिषद की ओर से पाठ्य पुस्तकें और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। साहित्यकारों ने कहा कि शिक्षित बेटियाँ ही नए भारत की 'पुष्प' हैं जो देश का भाग्य बदलेंगी।

5. कवि गोष्ठी और युवा स्वर

समारोह के उत्तरार्ध में एक संक्षिप्त कवि गोष्ठी हुई, जिसमें युवा कवि दिवाकर कुमार और निशा भारती ने अपनी रचनाओं के माध्यम से राष्ट्रप्रेम की अलख जगाई। कार्यक्रम में भारी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित थे, जिन्होंने इस आयोजन को सफल बनाया।

6. टाइम्स भारत न्यूज़ का विश्लेषण: आज के दौर में चतुर्वेदी जी की प्रासंगिक

पंडित माखनलाल चतुर्वेदी का निधन भले ही 30 जनवरी 1968 को हो गया हो, लेकिन उनकी 'भारतीय आत्मा' आज भी हर उस कलम में जीवित है जो सच लिखती है। आज के डिजिटल युग में, जहाँ सूचनाओं की बाढ़ है, चतुर्वेदी जी की 'कर्मवीर' जैसी पत्रकारिता हमें सिखाती है कि शब्द केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि क्रांति का माध्यम होने चाहिए।

 

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